मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO में एक बार फिर से नया कार्य विभाजन किया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है। इस नए सिस्टम के तहत अपर मुख्य सचिव नीरज मण्डलोई को और अधिक शक्तिशाली बना दिया गया है। अब वे CMO में हर बड़े काम के लिए सिंगल विंडो ऑफिसर की भूमिका में होंगे।
नई व्यवस्था के तहत, CMO में कार्यरत अधिकारियों को चार समूहों — A, B, C, D — में विभाजित किया गया है। हर ग्रुप के पास विशिष्ट जिम्मेदारियां होंगी, जिससे न केवल जवाबदेही बढ़ेगी बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया भी तेज होगी।
आइए विस्तार से समझते हैं कि CMO का यह नया ढांचा कैसा है और यह कैसे मध्य प्रदेश के शासनतंत्र को प्रभावित करेगा।
CMO का ग्रुप A – प्रमुख समन्वय और फाइलों की निगरानी
ग्रुप A की जिम्मेदारी नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव को सौंपी गई है। उनके पास CMO की सबसे महत्वपूर्ण फाइलें और निर्देश होंगे। मुख्यमंत्री की ओर से भेजी गई ‘A+’, ‘A मॉनिटर’ नोटशीट्स, विभागीय पत्रों की समीक्षा, नीतिगत निर्णय, और विशेष आयोजनों का समन्वय उनकी देखरेख में होगा।
इसके साथ ही, सिंहस्थ 2028 से जुड़े सभी कार्य भी नीरज मण्डलोई के ही अंतर्गत आएंगे। यानी अब CMO की लगभग हर महत्वपूर्ण फाइल उन्हीं के माध्यम से गुजरेगी, जिससे उन्हें एक सेंट्रल कमांडर की भूमिका मिल गई है।
ग्रुप B – विधायकों-सांसदों से जुड़े मुद्दों का समाधान
आईएएस आलोक कुमार सिंह, सचिव- मुख्यमंत्री को ग्रुप B की जिम्मेदारी दी गई है। वे गृह विभाग को छोड़कर सभी विभागों के स्थानांतरण प्रस्तावों, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विधायकों और सांसदों के मुद्दों, सरकारी और गैर-सरकारी नामांकन, नियुक्तियां और कार्यालय व्यवस्थाओं के प्रभारी होंगे।
इस जिम्मेदारी के माध्यम से वे जनप्रतिनिधियों और शासन के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करेंगे, जिससे जन समस्याओं का निवारण तेज़ी से हो सके।
ग्रुप C – दिल्ली और भारत सरकार से समन्वय
इस ग्रुप की कमान आईएएस इलैयाराजा टी., सचिव- मुख्यमंत्री को सौंपी गई है। वे केंद्र सरकार से जुड़ी सभी बैठकों, पत्राचार, कार्यक्रमों और योजनाओं की निगरानी करेंगे। इसके अलावा, राज्य सरकार की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी।
सबसे अहम बात यह है कि सीएम डैशबोर्ड और आईटी मॉनिटरिंग सिस्टम की संपूर्ण देखरेख भी अब उन्हीं के अधीन होगी। यह डिजिटल युग में CMO की टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली छवि को और मजबूत करेगा।
ग्रुप D – मुख्यमंत्री के दौरों और राहत कार्यों की देखरेख
अपर सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे को ग्रुप D की जिम्मेदारी दी गई है। वे मुख्यमंत्री के राज्यभर में होने वाले दौरों, मुख्यमंत्री राहत कोष, जनता से प्राप्त आवेदनों और दौरे के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदार होंगे।
इससे न केवल लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान होगा बल्कि मुख्यमंत्री के फील्ड विजिट का असर भी सीधा नजर आएगा।
CMO में नई कार्यप्रणाली क्यों है जरूरी?
राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह विभागवार कार्य विभाजन से न केवल गवर्नेंस में पारदर्शिता आएगी, बल्कि अधिकारी सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे। इससे आम जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं का जल्दी समाधान संभव हो सकेगा।
नई कार्यप्रणाली में तकनीकी मॉनिटरिंग, फील्ड रिपोर्टिंग, और नीतिगत निर्णयों की समीक्षा जैसे अहम हिस्सों को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, CM डैशबोर्ड जैसे डिजिटल टूल्स की सहायता से योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की सटीक निगरानी की जा सकेगी।
CMO की यह पहल लाएगी बदलाव?
यदि यह नया कार्य विभाजन केवल कागज़ों तक सीमित न रहकर, कंट्रोल रूम स्टाइल में जमीनी रूप से लागू किया जाता है, तो निश्चित ही यह प्रशासनिक फैसलों को मजबूत बनाएगा। लेकिन इसकी असली परीक्षा तो तभी होगी जब जनता को इसका सीधा लाभ महसूस हो। भविष्य में योजनाओं की समीक्षा, जनशिकायतों का समाधान और सरकारी संवाद में यह सिस्टम तेज़, पारदर्शी और जवाबदेह साबित हो सकता है।

निष्कर्ष
CMO में किया गया यह नया कार्य विभाजन प्रशासन को एक नई दिशा देने की कोशिश है। अगर इसे सच्चे अर्थों में लागू किया गया, तो न केवल अधिकारी अपने कार्यों को बेहतर ढंग से निभा पाएंगे, बल्कि जनता का भरोसा भी प्रशासन पर और गहरा होगा। हर भोपाली और मध्यप्रदेशवासी को इस नवाचार से जुड़ी पारदर्शिता का लाभ लेना चाहिए और शासन को ज्यादा जिम्मेदार बनाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।