आज उज्जैन में नाग पंचमी (29 जुलाई 2025) के अवसर पर जिस परमेश्वर की पूजा-अर्चना की गई, वह हैं भगवान श्री नागचंद्रेश्वर। आइए नीचे उनके बारे में विस्तार से जानें:
1. नागचंद्रेश्वर भगवान कौन हैं उनके दर्शन से किस दोष का निवारण होता है
स्थान व परंपरा
नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की तीसरी मंजिल पर स्थित है। यह मंदिर साल में केवल एक दिन, नाग पंचमी (29 जुलाई) को रात 12 बजे से 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। बाकी समय यह बंद रहता है ।
पौराणिक कथा के अनुसार जानकारी
मान्यता है कि सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव की तपस्या की और अमरता का वरदान प्राप्त किया। वह शिव के साथ महाकाल वन में रहने लगा, लेकिन शिव की उपासना में विघ्न न आए, इसलिए भगवान शिव ने निर्णय लिया कि केवल साल में एक दिन — नाग पंचमी पर ही दर्शन संभव होंगे ।
2. पूजा-अर्चना और आज की विशेष विधियाँ जिसका आज के दिन विशेष महत्व है
त्रिकाल पूजा
- रात 12 बजे मंदिर के पट खोलने के तुरंत बाद महानिर्वाणी अखाड़ा द्वारा प्रथम पूजा/अभिषेक।
- दोपहर 12 बजे जिला प्रशासन द्वारा दूसरी पूजा।
- शाम के समय महाकाल मंदिर समिति द्वारा संध्या आरती के बाद तीसरी और अंतिम पूजा, जिसके बाद फिर से पट बंद कर दिए जाते हैं ।
उज्जैन श्रद्धालुओं की भीड़
आज सुबह 1:30 बजे तक लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, और प्रशासन की अनुमानित संख्या 10 लाख तक है। करीब 2 किमी की कतारें, भीड़ प्रबंधन के लिए 200 वरिष्ठ अधिकारी, 1,800 पुलिसकर्मी, 2,500 कर्मचारी, और 560 CCTV कैमरे स्थापित किए गए थे ।
कालसर्प दोष निवारण
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि नागचंद्रेश्वर भगवान की पूजा से कालसर्प दोष, नाग दोष और अन्य दोषों से मुक्ति मिलती है, विशेषकर इस दिन दूध अर्पित कर शुभ फल की कामना की जाती है ।
3. आज के आयोजन का प्रभाव
उज्जैन में सर्वाधिक भक्तों की भीड़: लगभग 5 लाख लोगों ने दर्शन कर लिए, जबकि प्रशासन ने 10 लाख भक्तों के दर्शन सम्भव बताए हैं ।
विशेष सुरक्षा व व्यवस्था: प्रशासन, पुलिस और मंदिर समिति की ओर से पूरे 24 घंटे की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी ।
4. दिव्य संदेश: क्या है महत्व?
नागों को भगवान शिव के आभूषण के रूप में माना जाता है, और नाग पंचमी पर नागों की पूजा करना प्रकृति और आध्यात्मिकता के प्रति श्रद्धा दर्शाता है ।
पूजा विधि में दूध, फूल, दीप आदि अर्पित कर स्वस्थ, समृद्धि, और परिवार की रक्षा की कामना की जाती है, विशेषकर कालसर्प दोष, पितृदोष या अन्य नकारात्मक राशिफल दोषों से मुक्ति के लिए ।
दर्शन का दिन मात्र एक दिन नागपंचमी
परमेश्वर श्री नागचंद्रेश्वर
स्थान महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन (तीसरी मंजिल)
वर्ष में दर्शन सिर्फ नाग पंचमी पर 24 घंटे के लिए खुले
विशेष पूजा त्रिकाल पूजा (मध्यरात्रि, दोपहर, संध्या)
श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 5 लाख दर्शन, अधिकतम 10 लाख अनुमानित
मान्यता कालसर्प दोष, नाग दोष आदि का निवारण
पूजा विधियाँ दूध, फूल, दीप, मंत्र, अभिषेक आदि